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Tuesday, 19 March 2013

यात्रा ...भोर तक

चन्द्र खींचता रात की बग्घी
तारे अपलक ताक रहे थे
ढली हुई पलकों में सज के
स्वप्न सलोने झाँक रहे थे.
मंद-मंद विहसित बयार थी
कुसुम सुगंधी टाँक रहे थे
चन्द्र-प्रभा के घिरते बादल
रजत-चदरिया ढांक रहे थे.
अर्ध-निद्रा में खोयी वसुधा
निशि-चक क्षिति लाँघ रहे थे
पार क्षितिज ऊषा के पंछी
उजला रस्ता नाप रहे थे.
आह ! पहुँच निकट भोर के द्वारे
रात के चक्के हाँफ रहे थे
मयंक स्वेद-कणों के मनके
पंखुरियों पे काँप रहे थे.
किरणें आरूढ़ काल के रथ पे
देव-सूर्य अश्व हांक रहे थे
अहा ! स्वागत में प्रभात के
अंबर रश्मियाँ तान रहे थे.
कुछ ही पल थे शेष विहान में
दिश पूरब खग आँक रहे थे
उजली किरणों के स्वागत में
पंकज पांख पसार रहे थे .

28 comments:

  1. प्रभात का सुन्दर चित्रण.

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  2. बधाई हो आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति आज के ब्लॉग बुलेटिन पर प्रकशित की गई है | सूचनार्थ धन्यवाद |

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    1. बहुत-बहुत शुक्रिया

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  3. bahut sunder rachna hai shikha.bhaut sambhal ke shabdon ka chayan hua hai aur bahut sunder varnan prabhat ka/....esa bhi likh leti hain aap ..bahut acha laga

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  4. Raat se subah ki taraf badhti behad sundar rachna... badhai.

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  5. रात से भोर तक का सफर ... पहले रात की मधुर क्षत फिर किरणों का उजाला ...
    अनुपम शब्दों में बाँधा है पूरे सफर को ....

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  6. वाह....
    बहुत सुन्दर....
    आह ! पहुँच निकट भोर के द्वारे
    रात के चक्के हाँफ रहे थे

    लगा केनवास पर की गयी कोई चित्रकारी हो...
    अनु

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  7. चन्द्र-प्रभा से उजली किरणों तक का सुन्दर स्वागत ...बहुत खूबसूरत रचना ... शुभकामनाये

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  8. शानदार बहुत खूब

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  9. बहुत सुंदर भावनायें और शब्द भी ...बेह्तरीन अभिव्यक्ति !शुभकामनायें.
    आपका ब्लॉग देखा मैने और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.
    http://madan-saxena.blogspot.in/
    http://mmsaxena.blogspot.in/
    http://madanmohansaxena.blogspot.in/
    http://mmsaxena69.blogspot.in/

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  10. अहा ! स्वागत में प्रभात के
    अंबर रश्मियाँ तान रहे थे.
    कुछ ही पल थे शेष विहान में
    दिश पूरब खग आँक रहे थे
    उजली किरणों के स्वागत में
    पंकज पांख पसार रहे थे-बहुत सुन्दर भाव


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    latest postअनुभूति : सद्वुद्धि और सद्भावना का प्रसार

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  11. रात्रि और भोर दोनों को अच्छा समेटा आपने!

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  12. प्रकृति का खूबसूरत चित्रण

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  13. कुदरत की खूबसूरती में आपके सुंदर शब्दों ने
    रंग भर दिए ....
    शुभकामनायें!

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  14. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (24-03-2013) के चर्चा मंच 1193 पर भी होगी. सूचनार्थ

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    1. रचना के चयन के लिए बहुत-बहुत आभार

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  15. अद्भुत सौंदर्य शब्दों में ....कल्पना में भी .....!!!!!

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  16. waah...ek lambe arse baad itni bhavpoorna kavita padhne ko mili..man prasann ho gaya...behad shaandar rachna..bahut bahut badhai..lajawaab kar diya apne.

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  17. શિખા : कहाँ हो....? लंबा गेप हो गया...!!

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  18. उत्कृष्ट प्रस्तुति !!!!

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  19. चन्द्र खींचता रात की बग्घी
    तारे अपलक ताक रहे थे
    ढली हुई पलकों में सज के
    स्वप्न सलोने झाँक रहे थे

    तुकांत कविताएँ मुझे हमेशा से प्रिय रही हैं और इन पंक्तियों को पढ़कर तो आनंद आ गया ।

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  20. This comment has been removed by the author.

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  21. बहुत ही सुन्दर! अप्रतिम! बहुत बहुत बधाई!

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  22. पिछले २ सालों की तरह इस साल भी ब्लॉग बुलेटिन पर रश्मि प्रभा जी प्रस्तुत कर रही है अवलोकन २०१३ !!
    कई भागो में छपने वाली इस ख़ास बुलेटिन के अंतर्गत आपको सन २०१३ की कुछ चुनिन्दा पोस्टो को दोबारा पढने का मौका मिलेगा !
    ब्लॉग बुलेटिन इस खास संस्करण के अंतर्गत आज की बुलेटिन प्रतिभाओं की कमी नहीं 2013 (5) मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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    1. मेरी रचना को इस योग्य समझा ....आपका बहुत-बहुत आभार

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