Tuesday, 19 March 2013
Tuesday, 12 March 2013
चाहती हूँ यकीन कर लेना ...
'हर सपना साकार हो सकता है '
सचमुच ???
अभी जा कर पूछती हूँ .....
उन माँओं से ....
सत्य का पाठ पढ़ाकर
जीवन संग्राम में उतार आयीं जो
....अपनी संतानों को
और बदले में पाये अस्थि के फूल ...
सत्य की विजय के वादे
असत्य से ....
पूछती हूँ कलावतियों से ....
भलाई का संकल्प लिये
जो उतर पड़ीं समाज की कीचड़ में
नहीं उबर पातीं लेकिन
किसी भी सदी में
उस दलदल से ....
पूछती हूँ उन स्त्रीयों से
जो हस्तांतरित कर दी जाती है
पिता से पति तक
अधिकार विहीन
मर्यादित कर्तव्य में लिपटी
संस्कृति की डोर से
क्या सचमुच हर सपना
साकार हो सकता है ???
चाहती हूँ यकीन कर लेना
इस सपने पर ...
पर नहीं ...
यथार्थ का अट्टाहास
कुछ और ही समझाता है
हर सपना साकार कहाँ हो पाता है !!!
सचमुच ???
अभी जा कर पूछती हूँ .....
उन माँओं से ....
सत्य का पाठ पढ़ाकर
जीवन संग्राम में उतार आयीं जो
....अपनी संतानों को
और बदले में पाये अस्थि के फूल ...
सत्य की विजय के वादे
असत्य से ....
पूछती हूँ कलावतियों से ....
भलाई का संकल्प लिये
जो उतर पड़ीं समाज की कीचड़ में
नहीं उबर पातीं लेकिन
किसी भी सदी में
उस दलदल से ....
पूछती हूँ उन स्त्रीयों से
जो हस्तांतरित कर दी जाती है
पिता से पति तक
अधिकार विहीन
मर्यादित कर्तव्य में लिपटी
संस्कृति की डोर से
क्या सचमुच हर सपना
साकार हो सकता है ???
चाहती हूँ यकीन कर लेना
इस सपने पर ...
पर नहीं ...
यथार्थ का अट्टाहास
कुछ और ही समझाता है
हर सपना साकार कहाँ हो पाता है !!!
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