ख्वाहिशों की झील में
काई ने घर बनाया है
नीला सा आसमान
थोड़ा सा धुंधलाया है
किनारों की सील में
गहराता है सन्नाटा
खरपात ने दरारों में
फिर आसरा सजाया है
सीढ़ियाँ लिये बैठी हैं
खामोशी के कदम
युगों से कोई प्यासा भी
इस तरफ कहाँ आया है
आलीशान गुम्बदी
कुकुरमुत्ती हवेली से
भरमाये हैं मण्डुक
आह!क्या रुतबा पाया है
अमरबेल का हरियाया फर्श
मछलियों की छत पर
चुपके से पाँव पसार
बढ़ता चला आया है
पानी को ललचायी
साहिल पे बंधी डोंगी
उदास किनारों को
इस ने हमराज़ बनाया है
अमलतास से लिपटा
झील का सूना कोना
गुमचों में उमंगें भरता
इकलौता परछाया है
काई ने घर बनाया है
नीला सा आसमान
थोड़ा सा धुंधलाया है
किनारों की सील में
गहराता है सन्नाटा
खरपात ने दरारों में
फिर आसरा सजाया है
सीढ़ियाँ लिये बैठी हैं
खामोशी के कदम
युगों से कोई प्यासा भी
इस तरफ कहाँ आया है
आलीशान गुम्बदी
कुकुरमुत्ती हवेली से
भरमाये हैं मण्डुक
आह!क्या रुतबा पाया है
अमरबेल का हरियाया फर्श
मछलियों की छत पर
चुपके से पाँव पसार
बढ़ता चला आया है
पानी को ललचायी
साहिल पे बंधी डोंगी
उदास किनारों को
इस ने हमराज़ बनाया है
अमलतास से लिपटा
झील का सूना कोना
गुमचों में उमंगें भरता
इकलौता परछाया है